रोशनाबाद सिडकुल की 135 बीघा भूमि सरकार में समाहित करने की मांग तेज

Spread the love

कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, बोले—शिकायत निराधार है तो खारिज करे, वरना नियमों के तहत कार्रवाई करे

अमित कुमार

हरिद्वार। रोशनाबाद सिडकुल में आवासीय परियोजना के लिए आवंटित भूमि में से शेष बची 135 बीघा जमीन को राज्य सरकार में समाहित करने की मांग तेज हो गई है। इस मामले में लंबे समय से संघर्ष कर रहे रूहालकी किशनपुर निवासी राजेश कुमार के समर्थन में कांग्रेस नेताओं वरुण बालियान और मुरली मनोहर ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। प्रेस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों के समक्ष कई बार शिकायत और प्रार्थना पत्र देने के बावजूद मामले का निस्तारण नहीं होना गंभीर सवाल खड़े करता है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सरकार की निर्धारित शर्तों के अनुसार आवासीय परियोजना के लिए आवंटित भूमि पर दो वर्ष के भीतर निर्माण कार्य पूरा किया जाना था। राजेश कुमार का आरोप है कि निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बाद भी 135 बीघा भूमि शेष है, जिसे नियमानुसार राज्य सरकार में समाहित किया जाना चाहिए। इस मांग को लेकर वह लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

शिकायत पर निर्णय करे प्रशासन, मामले को लटकाना उचित नहीं

वरुण बालियान और मुरली मनोहर ने कहा कि प्रशासन को नियमों के अनुरूप कार्रवाई करते हुए मामले का निस्तारण करना चाहिए। यदि अधिकारियों को लगता है कि राजेश कुमार की शिकायत में दम नहीं है, तो उसे स्पष्ट रूप से खारिज कर संबंधित कंपनी के पक्ष में आदेश जारी किया जाना चाहिए। लेकिन न तो शिकायत पर अंतिम निर्णय लिया जा रहा है और न ही मामले का समाधान हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह प्रकरण को लंबे समय तक लंबित रखना उचित नहीं है।

कंपनी पर प्लॉटिंग और रजिस्ट्री के आरोप

रूहालकी किशनपुर निवासी राजेश कुमार ने आरोप लगाया कि निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बाद शेष बची 135 बीघा भूमि को राज्य सरकार में समाहित किया जाना चाहिए था। इसके बावजूद संबंधित कंपनी द्वारा भूमि पर प्लॉटिंग और रजिस्ट्री की जा रही है। उन्होंने कहा कि भूमि को बचाने और उसे सरकार में समाहित कराने के लिए वह लंबे समय से अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायत पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। राजेश कुमार ने शासन और प्रशासन से मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर निर्धारित शर्तों और नियमों के अनुसार शीघ्र निर्णय लिया जाए। उन्होंने कहा कि शेष भूमि के संबंध में स्थिति स्पष्ट करते हुए नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

अब प्रशासन की कार्रवाई पर निगाहें

135 बीघा भूमि को लेकर उठे इस विवाद में शिकायतकर्ता और कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप की मांग की है। हालांकि, भूमि आवंटन की शर्तों, समयसीमा और राज्य सरकार में भूमि समाहित किए जाने की पात्रता पर अंतिम स्थिति संबंधित अभिलेखों एवं सक्षम प्राधिकारी के निर्णय से ही स्पष्ट होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *