हिमालय में आयुर्वेद का वैश्विक केंद्र बनेगा धन्वंतरि धाम, हर साल होगा हर्बल कुंभ

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कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने किया तीन दिवसीय हर्बल कुंभ, जड़ी-बूटी कृषि मेला एवं धन्वंतरि महोत्सव-2026 का शुभारंभ

आचार्य बालकृष्ण बोले-पांच वर्षों में दुनिया के लिए आकर्षण और अध्ययन का प्रमुख केंद्र बनेगा धन्वंतरि धाम, 200 एकड़ में विकसित हो रहा औषधीय वनस्पतियों का अनूठा संसार

अमित कुमार 

पौड़ी गढ़वाल/हरिद्वार। हिमालय की गोद में आयुर्वेद, औषधीय वनस्पतियों, प्राकृतिक खेती और भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में पतंजलि की महत्वपूर्ण पहल ‘हर्बल वर्ल्ड हिमालय-श्री धन्वंतरि धाम’ में बुधवार को तीन दिवसीय हर्बल कुंभ, जड़ी-बूटी कृषि मेला एवं धन्वंतरि महोत्सव-2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के यमकेश्वर ब्लॉक स्थित मालाग्राम में आयोजित महोत्सव का उद्घाटन प्रदेश के कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने किया। इस अवसर पर पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण ने घोषणा की कि अब हर्बल कुंभ प्रतिवर्ष आयोजित होगा। उन्होंने बताया कि आगामी आयोजन 25 से 27 अक्टूबर 2027 तक होगा। मुख्य अतिथि डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि दुर्गम हिमालयी वन क्षेत्र में प्रकृति, पर्यावरण, परंपरा और परमार्थ के समन्वय से विकसित किया जा रहा धन्वंतरि धाम आने वाले समय में पूरी दुनिया के लिए अध्ययन, अनुसंधान और प्रेरणा का केंद्र बनेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि एक वर्ष के भीतर यह परिसर प्रमुख तीर्थ के रूप में अपनी पहचान स्थापित करेगा। प्रदेश के किसानों को यहां विशेष प्रशिक्षण दिलाने और विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों को अध्ययन के लिए भेजने की भी उन्होंने घोषणा की।

पांच वर्षों में दुनिया के लोग यहां सीखने आएंगे : डॉ. धन सिंह रावत

कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि वह पिछले पांच वर्षों से इस परियोजना की प्रगति देख रहे हैं। शुरुआती दौर में दुर्गम वन क्षेत्र में इतने बड़े प्रकल्प के विकसित होने की संभावनाओं को लेकर सवाल थे, लेकिन इस बार यहां पहुंचकर जो बदलाव दिखाई दिया, वह उनकी कल्पना से परे है। उन्होंने कहा कि आचार्य बालकृष्ण के समर्पण और परिश्रम से यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आने वाले पांच वर्षों में दुनिया के विभिन्न देशों से लोग यहां देखने और सीखने आएंगे। उन्होंने परिसर में विकसित नर्सरी, औषधीय पौधों, ध्यान केंद्र और विभिन्न देशों की चिकित्सा परंपराओं से जुड़े महापुरुषों की प्रतिमाओं की सराहना की। उन्होंने बताया कि यहां 29 देशों की जड़ी-बूटियों और उनसे जुड़ी ज्ञान परंपराओं पर कार्य किया गया है। परिसर में लगाए गए लगभग 50 हजार पौधों में से करीब 90 प्रतिशत पौधों का सुरक्षित रहना भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने हल्दी की खेती सहित औषधीय कृषि के प्रयासों की प्रशंसा की। मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के प्रगतिशील किसानों को यहां चार से पांच दिन का विशेष प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, जिससे वे औषधीय खेती, आधुनिक कृषि तकनीकों और अनुसंधान गतिविधियों को समझ सकें। विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों को भी यहां भेजा जाएगा, ताकि वे इस केंद्र में विकसित हो रही ज्ञान और अनुसंधान की गतिविधियों का प्रत्यक्ष अध्ययन कर सकें।

व्यापार नहीं, दुनिया को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ना उद्देश्य : आचार्य बालकृष्ण

आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि हर्बल वर्ल्ड हिमालय की परिकल्पना किसी व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को भारतीय ज्ञान, संस्कृति, आयुर्वेद और प्रकृति से आत्मीयता के साथ जोड़ने के संकल्प से की गई है। आयुर्वेद हजारों वर्षों से मानव कल्याण का आधार रहा है। भारत के ऋषियों और आयुर्वेद मनीषियों ने औषधीय वनस्पतियों के माध्यम से मानवता को जो ज्ञान दिया, उसका संरक्षण और वैश्विक प्रसार समय की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि 109 खंडों में 50 हजार से अधिक वनस्पतियों का औषधीय दृष्टि से संकलन किया गया है। धन्वंतरि धाम में विभिन्न देशों की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों और उनके विकास में योगदान देने वाले महान व्यक्तित्वों को भी सम्मान दिया जा रहा है। लगभग पांच वर्षों के परिश्रम से इस दुर्गम हिमालयी क्षेत्र में 50 हजार से अधिक औषधीय पौधे लगाए गए हैं। प्राकृतिक जलस्रोतों, जैव विविधता और पर्वतीय पर्यावरण के संरक्षण के साथ यहां अनुसंधान, अध्ययन, ध्यान और पर्यटन की सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

औषधीय खेती से रुकेगा पहाड़ों से पलायन

आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने के लिए स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार और आजीविका के अवसर विकसित करना जरूरी है। धन्वंतरि धाम किसानों को औषधीय पौधों की खेती, फसल विविधीकरण, मॉडल फार्मिंग और कृषि आधारित उद्यमिता का व्यावहारिक प्रशिक्षण देगा। इससे किसानों की आमदनी बढ़ाने और पहाड़ों में आर्थिक गतिविधियों को गति देने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल प्रदर्शनी या मेला नहीं, बल्कि किसानों के लिए सीखने और अपने खेतों में नई तकनीकों को अपनाने का अवसर है। आयुर्वेद, विज्ञान, अनुसंधान, संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और साहसिक पर्यटन को एक साथ जोड़कर हिमालय को वैश्विक पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।

भविष्य में औषधीय अनुसंधान का बड़ा केंद्र बनेगा हर्बल कुंभ : राकेश मित्तल

भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के केंद्रीय प्रभारी राकेश मित्तल ने कहा कि भारत में मेलों की परंपरा सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों के साथ ज्ञान एवं अनुभव के आदान-प्रदान का भी माध्यम रही है। हर्बल कुंभ इसी परंपरा का आधुनिक और वैज्ञानिक विस्तार है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले 50 से 200 वर्षों में यह स्थान वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। औषधीय वनस्पतियों पर अनुसंधान भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने आयुर्वेद के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में स्वामी रामदेव एवं आचार्य बालकृष्ण के प्रयासों की सराहना की।

200 एकड़ में विकसित हो रहा औषधीय वनस्पतियों का अनूठा संसार

लगभग 200 एकड़ में विस्तृत हर्बल वर्ल्ड हिमालय-श्री धन्वंतरि धाम को औषधीय, सुगंधित एवं फलदार वनस्पतियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए विकसित किया जा रहा है। तीन दिवसीय महोत्सव में 60 से 70 प्रदर्शनी स्टॉल लगाए गए हैं। इनमें औषधीय एवं सुगंधित पौधों, उच्च मूल्य वाली फसलों, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, कृषि उपकरणों, पारंपरिक उत्पादों और आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है। प्रदर्शनी में ‘धरती का डॉक्टर’ मृदा परीक्षण मोबाइल वैन आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इसके माध्यम से किसानों को मिट्टी की जांच और पोषक तत्वों के संतुलित प्रबंधन की जानकारी दी जा रही है। मृदा एवं जल संरक्षण, डिजिटल कृषि, कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण एवं विपणन, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन, मिलेट आधारित उद्योग और ग्रामीण उद्यमिता से संबंधित गतिविधियों को भी विशेष स्थान दिया गया है। किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और स्वयं सहायता समूहों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन एवं विपणन के अवसर दिए गए हैं। किसानों, वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों और उद्यमियों के बीच संवाद, कार्यशालाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम, कृषि क्षेत्र भ्रमण तथा क्रेता-विक्रेता सम्मेलन भी आयोजित किए जा रहे हैं।

पतंजलि किसान डायरी सहित चार पुस्तकों का विमोचन

महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर पतंजलि किसान डायरी और हर्बल कुंभ प्रशिक्षण पुस्तिका सहित चार पुस्तकों का विमोचन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार, संध्योपासना और यज्ञ के साथ हुआ। अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर महोत्सव का औपचारिक उद्घाटन किया। पतंजलि विश्वविद्यालय के संगीताचार्य चंद्रमोहन मिश्र एवं छात्र-छात्राओं ने संगीतमय प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम का संचालन पतंजलि अनुसंधान संस्थान के जड़ी-बूटी प्रभाग की प्रभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. वेदप्रिया आर्य ने किया। इस अवसर पर स्थानीय ग्रामीणों, किसान उत्पादक संगठनों, स्वयं सहायता समूहों के प्रतिनिधियों, श्रीमद् दयानंद कन्या गुरुकुल चोटीपुरा अमरोहा, पतंजलि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों तथा पतंजलि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। आचार्य बालकृष्ण, कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत एवं अन्य अतिथियों ने कृषि मेले के स्टॉलों का उद्घाटन कर उनका अवलोकन किया।

अब हर वर्ष 25 से 27 अक्टूबर तक होगा हर्बल कुंभ

आचार्य बालकृष्ण ने घोषणा की कि धन्वंतरि धाम में अब प्रतिवर्ष हर्बल कुंभ, जड़ी-बूटी कृषि मेला एवं धन्वंतरि महोत्सव आयोजित किया जाएगा। अगले वर्ष यह आयोजन 25 से 27 अक्टूबर 2027 तक होगा। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में इसे और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा। संकल्प है कि धन्वंतरि धाम दुनिया के लिए आयुर्वेद, औषधीय वनस्पतियों, प्राकृतिक खेती, अनुसंधान और भारतीय ज्ञान परंपरा का ऐसा केंद्र बने, जिसकी पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो।

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