कुंभ-2027 में भगदड़ रोकने की तैयारी तेज, अहम जिम्मेदारी निभाएंगे प्रशिक्षित एनसीसी कैडेट्स: डॉ. नरेश चौधरी

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उत्तराखंड प्रशासनिक अकादमी की दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में 160 कैडेट्स को दिया आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण, डॉ. नरेश चौधरी हुए सम्मानित

अमित कुमार

हरिद्वार। उत्तराखंड प्रशासनिक अकादमी, नैनीताल की ओर से गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग सभागार में आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एनसीसी कैडेट्स के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में इंडियन रेडक्रॉस उत्तराखंड के चेयरमैन प्रोफेसर डॉ. नरेश चौधरी को भीड़ नियंत्रण एवं आपदा प्रबंधन के विषय विशेषज्ञ के रूप में मुख्य वक्ता आमंत्रित किया गया। उन्होंने 160 एनसीसी कैडेट्स को आपदा प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के अपने अनुभव साझा किए। कार्यशाला के समापन पर उत्तराखंड प्रशासनिक अकादमी की ओर से डॉ. चौधरी को प्रतीक चिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया। प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए डॉ. नरेश चौधरी ने कहा कि उत्तराखंड अपनी भौगोलिक परिस्थितियों के कारण प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील राज्य है। वहीं कुंभ मेला, अर्धकुंभ, कांवड़ मेला और सोमवती अमावस्या जैसे विशाल धार्मिक आयोजनों के चलते हरिद्वार में मानवजनित आपदाओं की आशंका भी बनी रहती है। ऐसे में आपदा प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण के लिए प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने हरिद्वार में वर्ष 1986 के कुंभ मेले, 1996 की सोमवती अमावस्या, 2010 के कुंभ मेले, 2011 के शांति कुंभ शताब्दी पर्व तथा वर्ष 2025 में मनसा देवी मंदिर क्षेत्र में हुई भगदड़ की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन हादसों से सबक लेकर भविष्य की व्यवस्थाओं को अधिक मजबूत और प्रभावी बनाना आवश्यक है।डॉ. चौधरी ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन जागरूकता, पूर्व तैयारी और बेहतर प्रबंधन से उनके प्रभाव को कम किया जा सकता है। इसके विपरीत मानवजनित आपदाओं को सतर्कता, समन्वय और समय रहते उचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित करके रोका जा सकता है। इसके लिए जनमानस को जागरूक करने के साथ ही पूर्व में हुई घटनाओं से सीख लेना, पर्याप्त संसाधन जुटाना और व्यवस्थागत कमियों को प्राथमिकता से दूर करना जरूरी है। भीड़ नियंत्रण प्रबंधन के व्यावहारिक गुर सिखाते हुए उन्होंने कहा कि कुंभ मेला-2027 में प्रशिक्षित एनसीसी कैडेट्स और स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। मुख्य स्नान पर्वों पर ये स्वयंसेवक कुंभ मेला प्रशासन के साथ मिलकर व्यवस्थाओं को सुचारु बनाने, श्रद्धालुओं की भीड़ नियंत्रित करने और आपातकालीन परिस्थितियों में सहयोग प्रदान करने में अहम योगदान दे सकते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम कुंभ मेला-2027 को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और निर्विघ्न संपन्न कराने में सहायक सिद्ध होंगे। कार्यशाला में उत्तराखंड प्रशासनिक अकादमी के आपदा प्रकोष्ठ प्रभारी एवं कोर्स निदेशक डॉ. ओम प्रकाश ने भी प्रशिक्षणार्थियों को आपदाओं से निपटने के विभिन्न पहलुओं की विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला के समापन अवसर पर उत्तराखंड प्रशासनिक अकादमी की ओर से डॉ. ओम प्रकाश ने इंडियन रेडक्रॉस उत्तराखंड के चेयरमैन प्रोफेसर डॉ. नरेश चौधरी को प्रतीक चिह्न भेंटकर विशेष रूप से सम्मानित किया। इस अवसर पर डॉ. नरेश चौधरी ने अकादमी के महानिदेशक एवं आपदा प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. ओम प्रकाश का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासनिक अकादमी की ओर से आउटरीच कार्यक्रम के माध्यम से स्थानीय स्वयंसेवकों को विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षित करने की पहल सराहनीय है। इस प्रकार के प्रशिक्षण का वास्तविक लाभ आपदा प्रबंधन की जमीनी व्यवस्था और आमजन की सुरक्षा में दिखाई देगा।

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