मातृशक्ति का सम्मान करना सिखाती है हमारी संस्कृति: भक्त दुर्गादास

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वैष्णो देवी मंदिर में धूमधाम से मनाया गया मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा समारोह
श्रद्धा, भक्ति और भजनों से गूंजा मंदिर परिसर
अमित कुमार

हरिद्वार। तीर्थनगरी हरिद्वार के उत्तरी क्षेत्र सप्तसरोवर स्थित सिद्धपीठ पवित्र गुफा वाली वैष्णो देवी मंदिर में मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा समारोह अत्यन्त श्रद्धा एवं उत्साह के साथ आयोजित किया गया। इस पावन अवसर पर मंदिर परिसर में माता के भजनों की गूंज से उपस्थित भक्तजन भक्ति रस में सराबोर हो गए।
मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा के शुभारंभ के अवसर पर मंदिर संचालक भक्त दुर्गादास ने उपस्थित भक्तजनों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज के पवित्र दिन ही मंदिर में माता वैष्णो देवी की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा विधिवत रूप से की गई थी। उन्होंने बताया कि यह मंदिर पूज्य माता लाल देवी की प्रेरणा से वैष्णो देवी मंदिर (कटरा, जम्मू) की तर्ज पर हरिद्वार में निर्मित किया गया है, ताकि श्रद्धालु बिना लंबी यात्रा के भी मां वैष्णो देवी के दर्शन कर सकें। भक्त दुर्गादास ने कहा कि आतंकवाद के दौर में जब वैष्णों देवी जाना अत्यन्त कठिन हो गया था, तब पूज्य लाल माता जी ने श्रद्धालुओं की भावना को समझते हुए तीर्थनगरी हरिद्वार में वैष्णों देवी की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा कर श्रद्धालुओं को हरिद्वार में ही वैष्णों देवी मन्दिर व गुफा दर्शन का सौभाग्य प्रदान किया था। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति मातृशक्ति का सम्मान करना सिखाती है, उसी परम्परा के तहत आज मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा के वार्षिक उत्सव के अवसर पर अखंड परमधाम में कथा वाचन का प्रशिक्षण ले रही 46 साध्वियों का मंदिर परिसर में स्वागत किया गया। मंदिर संचालक भक्त दुर्गादास ने सभी साध्वियों का पुष्पवर्षा कर अभिनंदन किया। इन साध्वियों ने युग पुरुष स्वामी परमानंद गिरि महाराज के आदेश पर माता रानी की भेंटे और भजन प्रस्तुत किए, जिनकी मधुर ध्वनि से संपूर्ण मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा।
माता के भजनों और भेंटों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उपस्थित भक्तजन मंत्रमुग्ध होकर भजनों में लीन हो गए और पूरे वातावरण में एक अलौकिक ऊर्जा का संचार हुआ। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि यह महिला साध्वी परंपरा को भी सशक्त करने वाला रहा। समारोह के अंत में मंदिर की परंपरा के अनुसार साधु-संतों को ससम्मान भोजन प्रसाद वितरित किया गया। आयोजन में स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ दूर-दराज से आए भक्तों ने भी भाग लिया और इस पावन अवसर को अपनी उपस्थिति से पावन बनाया।

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