अंतरराष्ट्रीय महोत्सव के दूसरे दिन देश-विदेश के साहित्यकारों ने साझा किए विचार, नालंदा पुस्तकालय को ज्ञान और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का केंद्र बनाने पर जोर
अमित कुमार
देहरादून। थानों स्थित लेखक गाँव में आयोजित लेखक गाँव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव–2026 का दूसरा दिन साहित्य, कला, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा के नाम रहा। देश-विदेश से जुटे साहित्यकारों, विद्वानों, कलाकारों और संस्कृति प्रेमियों ने वैश्विक सांस्कृतिक संवाद, मानवीय संवेदना तथा भारतीय विरासत के संरक्षण पर विचार साझा किए। वक्ताओं ने लेखक गाँव की परिकल्पना को साहित्यिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की महत्वपूर्ण पहल बताते हुए इसे विश्व समुदाय को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने वाला मंच बताया। द्वितीय दिवस का शुभारंभ उत्तराखंड सरकार के परिवहन एवं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री प्रदीप बत्रा ने किया। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जीवन की वास्तविक सार्थकता दूसरों के लिए कुछ करने में है। लेखक गाँव ऐसा विशिष्ट स्थल है, जहां साहित्य और प्रकृति के सान्निध्य में मानवीय मूल्यों, संवेदनाओं और जीवन के गहरे अर्थों को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि यह पहल उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के साथ लोगों को आत्मिक शांति और सकारात्मक जीवन-दृष्टि प्रदान कर सकती है। मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन ने कहा कि लेखक गाँव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव विभिन्न देशों के बीच साहित्य, कला और संस्कृति का सशक्त सेतु बनेगा। यह आयोजन भारतीय दर्शन के ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के संदेश को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के साथ विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद, आपसी समझ और मैत्री को मजबूत करेगा। प्रसिद्ध चित्रकार एवं पुरातत्वविद् पद्मश्री डॉ. यशोधर मठपाल ने कहा कि उत्तराखंड की कला, संस्कृति और ज्ञान परंपरा का संरक्षण करना प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। उन्होंने लेखक गाँव की परिकल्पना को दुर्लभ और विशिष्ट बताते हुए कहा कि यहां जिस तरह की बौद्धिक संपदा एकत्रित हो रही है, वह भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि लेखक गाँव का नालंदा पुस्तकालय ज्ञान और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रमुख केंद्र बनेगा। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली के सदस्य सचिव प्रो. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि प्रत्येक स्थान का अपना इतिहास, सांस्कृतिक महत्व और स्थल-पुराण होता है। लेखक गाँव में जुटे साहित्यकारों और कलाकारों के अनुभव, रचनाएं तथा विचार इस स्थान की सांस्कृतिक पहचान को समृद्ध करेंगे। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को साहित्य और भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ना समय की आवश्यकता है, ताकि युवा अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझ सकें।गुजरात साहित्य अकादमी, गांधीनगर के अध्यक्ष डॉ. भाग्येश झा ने विनम्रता और संवेदनशीलता को मानवीय व्यक्तित्व की महत्वपूर्ण विशेषताएं बताया। उन्होंने रोबोटिक मशीनों की कार्यक्षमता और मानवीय चेतना के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए श्रीमद्भगवद्गीता की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उनके अनुसार, भारतीय ज्ञान परंपरा मनुष्य को आत्मबोध, मानसिक संतुलन और सकारात्मक जीवन-दृष्टि प्रदान करती है। वैश्विक हिंदी परिवार के अध्यक्ष अनिल जोशी ने लेखक गाँव की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस स्थान पर कभी केवल मैदान दिखाई देता था, आज वह एक साकार होती सांस्कृतिक परिकल्पना बन चुका है। यहां का प्राकृतिक वातावरण भी साहित्यिक चेतना का अनुभव कराता है। उन्होंने कहा कि नालंदा पुस्तकालय और तक्षशिला जैसे केंद्र भारतीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक पुनर्जागरण के प्रतीक बन सकते हैं। प्रसिद्ध साहित्यकार एवं उद्योगपति इंद्रजीत शर्मा ने कहा कि लेखक गाँव भारतीय संस्कृति, साहित्य और ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण संवाहक बनकर उभर रहा है। डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के साहित्य के प्रति समर्पण और संरक्षण ने इस परिकल्पना को साकार रूप दिया है। सौ से अधिक पुस्तकों के रचयिता डॉ. निशंक का साहित्यिक योगदान इस पहल को वैचारिक आधार प्रदान करता है। उन्होंने विश्वास जताया कि लेखक गाँव आने वाली पीढ़ियों के लिए सृजन, संवाद और सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।ऑस्ट्रेलिया की लेखिका मृदुला कीर्ति ने भारतीय वेदों, पुराणों और श्रीमद्भागवत की ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय ऋषियों के चिंतन ने मानवता को प्रकृति, चेतना, जीवन और आध्यात्मिकता से जुड़े गहन विचार दिए हैं। लेखक गाँव जैसी पहल इन परंपराओं को आधुनिक संदर्भों में समझने और विश्व समुदाय तक पहुंचाने का सार्थक माध्यम है। लेखक गाँव की निदेशक विदुषी निशंक ने अतिथियों, साहित्यकारों, कलाकारों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि महोत्सव विविध भाषाओं, विचारों और रचनात्मक अभिव्यक्तियों को एक साझा मंच प्रदान करता है। इसका उद्देश्य संवाद के माध्यम से नई संभावनाओं का सृजन करना और भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाना है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न साहित्यकारों की पुस्तकों का लोकार्पण एवं विमोचन भी किया। उन्होंने साहित्य को समाज की चेतना, राष्ट्रबोध और मानवीय मूल्यों का आधार बताते हुए कहा कि लेखक गाँव भारतीय भाषाओं, साहित्यिक विरासत और वैश्विक सांस्कृतिक संवाद को समर्पित एक महत्वपूर्ण पहल है। महोत्सव का दूसरा दिन साहित्य, कला, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा पर सार्थक विमर्श के साथ आगे बढ़ा। देश-विदेश के प्रतिष्ठित विद्वानों और रचनाकारों की सहभागिता ने लेखक गाँव को वैश्विक साहित्यिक संवाद, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और मानवीय चेतना के विस्तार का महत्वपूर्ण मंच बना दिया।











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