हरिद्वार में ज्ञान-परंपरा का नया अध्याय, शुरू हुआ पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम्

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सीएम धामी ने किया प्रथम गुरुकुलम् का शुभारंभ, बोले—आधुनिक विज्ञान के साथ संस्कार और भारतीय जीवन मूल्यों का समन्वय जरूरी

अमित कुमार

हरिद्वार। योग और आयुर्वेद की धरती हरिद्वार में भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने की दिशा में आज एक नया अध्याय जुड़ गया। पतंजलि वेलनेस योगग्राम, औरंगाबाद में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रथम पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि यह गुरुकुलम् भारतीय ज्ञान परंपरा, आधुनिक विज्ञान, योग और आयुर्वेद के समन्वय का सशक्त केंद्र बनेगा और नई पीढ़ी को ज्ञान के साथ संस्कारों से भी जोड़ेगा।मुख्यमंत्री ने गुरुकुलम् के शुभारंभ पर योगगुरु स्वामी रामदेव, आचार्य बालकृष्ण और पतंजलि परिवार को बधाई दी। उन्होंने कहा कि हरिद्वार केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान और आध्यात्मिक परंपरा की महत्वपूर्ण भूमि भी है। ऐसे में यहां भारतीय गुरुकुल परंपरा को नए स्वरूप में आगे बढ़ाने वाली पहल का विशेष महत्व है।

किताबी ज्ञान से आगे, जीवन का पाठ पढ़ाएगी शिक्षा

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की गुरुकुल परंपरा ने हजारों वर्षों तक ज्ञान, अनुशासन, संस्कार और चरित्र निर्माण की नींव मजबूत की है। गुरुकुल शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा और रोजगार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन जीने की कला और समाज के प्रति दायित्व का बोध कराना भी रहा है।

‘सा विद्या या विमुक्तये’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य मनुष्य को अज्ञान, भय और संकीर्णता से मुक्त कर उसके व्यक्तित्व का समग्र विकास करना है।

परंपरा और आधुनिकता का संगम बनेगा गुरुकुलम्

धामी ने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में नई पीढ़ी को आधुनिक ज्ञान के साथ अपनी जड़ों की समझ भी जरूरी है। पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् में आधुनिक विज्ञान और तकनीक के साथ योग, आयुर्वेद, भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों का समन्वय विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेगा।

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उन्होंने कहा कि आधुनिकता और परंपरा एक-दूसरे की विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। अपनी विरासत से जुड़े रहकर आधुनिक ज्ञान हासिल करने वाली युवा पीढ़ी भविष्य का सामना अधिक आत्मविश्वास से कर सकती है।

एनईपी-2020 का जिक्र, कौशल और नवाचार पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में कौशल, नवाचार, भारतीय ज्ञान परंपरा और विद्यार्थियों के समग्र विकास पर विशेष जोर दिया गया है। उत्तराखंड भी नई शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा, दर्शन और संस्कृति के अध्ययन एवं शोध को बढ़ावा देने के लिए दून विश्वविद्यालय में हिंदू अध्ययन केंद्र स्थापित किया गया है। राज्य में विज्ञान, शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए देहरादून में साइंस सिटी विकसित की जा रही है।

योग-आयुर्वेद के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरेगा उत्तराखंड

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को पर्यटन के साथ ज्ञान, योग, आयुर्वेद और अध्यात्म के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने विश्वास जताया कि गुरुकुलम् आने वाले समय में देश-विदेश के विद्यार्थियों के लिए योग, आयुर्वेद, भारतीय ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। यहां से निकलने वाले विद्यार्थी ज्ञान और संस्कार के साथ सेवा की भावना लेकर समाज एवं राष्ट्र निर्माण में योगदान देंगे। इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, विधायक आदेश चौहान, विधायक रवि बहादुर, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, गोल्डन बाबा, स्वामी भू देव, भाजपा जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा, भाजपा रुड़की जिलाध्यक्ष डॉ. मधु सिंह, राज्यमंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि, राज्यमंत्री आदेश सैनी समेत अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी, संस्थान के छात्र-छात्राएं और गणमान्य लोग मौजूद रहे।

गुरुकुलम् की परिकल्पना: ज्ञान के साथ संस्कार। विज्ञान के साथ भारतीयता। योग के साथ स्वास्थ्य। आयुर्वेद के साथ परंपरागत ज्ञान। शिक्षा के साथ सेवा।

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