हिमालयी जड़ी-बूटियों से आत्मनिर्भरता की नई कहानी

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नंदिनी ने ‘Himalayan Twacha’ के जरिए स्थानीय संसाधनों को दिया नया बाजार

अमित कुमार

हल्द्वानी। उत्तराखंड में युवा उद्यमिता और स्थानीय संसाधनों को बढ़ावा देने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से प्रदेश के युवा नए अवसर तलाश रहे हैं। हल्द्वानी की बीएससी बायोटेक्नोलॉजी की छात्रा और युवा उद्यमी नंदिनी ने हिमालयी जड़ी-बूटियों और प्राकृतिक सामग्री को स्वरोजगार का माध्यम बनाकर इसकी प्रेरक मिसाल पेश की है। नंदिनी ने ‘Himalayan Twacha’ नाम से अपना उद्यम शुरू किया है, जिसके तहत हिमालयी जड़ी-बूटियों और प्राकृतिक सामग्री से हस्तनिर्मित साबुन तैयार किए जा रहे हैं। उनके उत्पादों में बुरांश, सी-बकथॉर्न, केसुड़ा, नीम, एलोवेरा, मिक्स फ्रूट और गोट मिल्क जैसे साबुन शामिल हैं। नंदिनी के अनुसार साबुन तैयार करने में कैस्टर ऑयल, नारियल तेल, शीया बटर और कोकोआ बटर जैसे प्राकृतिक घटकों का इस्तेमाल किया जाता है। उत्पादों को सैपोनिफिकेशन प्रक्रिया के जरिए तैयार किया जाता है।

पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग बनी पहचान

‘Himalayan Twacha’ की खासियत केवल प्राकृतिक उत्पाद ही नहीं, बल्कि इसकी पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग भी है। साबुनों को प्लांट लीव्स में पैक कर जूट की रस्सी से बांधा जाता है। इससे उत्पाद की पैकेजिंग में स्थानीय परंपरा और आधुनिक प्रस्तुति का अनूठा मेल दिखाई देता है।

नंदिनी का कहना है कि हिमालय उनके लिए सिर्फ कारोबार का माध्यम नहीं, बल्कि उनकी जड़ों और पारंपरिक ज्ञान का हिस्सा है। वह स्थानीय जड़ी-बूटियों से जुड़े पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक उद्यमिता से जोड़कर उत्तराखंड की प्राकृतिक विरासत को नए बाजार तक पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं।

मेलों ने दिया बाजार और पहचान

नंदिनी बताती हैं कि राज्य सरकार की ओर से स्थानीय उत्पादों और युवा उद्यमियों को उपलब्ध कराए जा रहे मंच से उन्हें अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री का अवसर मिल रहा है। सरस मेले समेत विभिन्न आयोजनों में स्टॉल मिलने से उनके उत्पादों को नए ग्राहकों तक पहुंच बनाने और कारोबार को विस्तार देने में मदद मिली है।नंदिनी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों और युवा उद्यमियों को मिल रहे मंच से उन्हें अपने सपनों को आगे बढ़ाने में सहयोग मिला है। ‘Himalayan Twacha’ की पहल स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान और युवा उद्यमिता के मेल से स्वरोजगार की नई राह दिखा रही है। यह पहल हिमालयी उत्पादों को स्थानीय बाजार से आगे व्यापक बाजार तक पहुंचाने की संभावनाओं को भी सामने रखती है।

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