प्राच्य से अत्याधुनिक ज्ञान-विज्ञान तक होगा मंथन, पतंजलि विश्वविद्यालय में जुटेंगे देश-विदेश के विद्वान

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29 से 31 अक्टूबर तक 52वां अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन; AI, संगणकीय विज्ञान, वेद-वेदांत, योग और आयुर्वेद समेत विविध विषयों पर होगा विमर्श

आलोक

नई दिल्ली। भारतीय ज्ञान-परंपरा को आधुनिक एवं अत्याधुनिक ज्ञान-विज्ञान से जोड़ने के उद्देश्य से 52वें अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन का आयोजन 29 से 31 अक्टूबर 2026 तक पतंजलि विश्वविद्यालय में किया जाएगा। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने बताया कि तीन दिवसीय सम्मेलन में देश-विदेश के हजारों विद्वानों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और युवा अध्यापकों के शामिल होने की संभावना है।  प्रो. वरखेड़ी ने कहा कि भारतीय विद्याओं को लेकर देश और विदेश में व्यापक स्तर पर शोध एवं अकादमिक विमर्श हो रहा है। अखिल भारतीय प्राच्य विद्या परिषद ने भारतीय इतिहास, संस्कृति, परंपरा और ज्ञान-विज्ञान को वैश्विक अकादमिक मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि करीब एक शताब्दी पूर्व भारत के स्वतंत्र होने से पहले भारतीय इतिहास, संस्कृति और प्राच्य विद्याओं के अध्ययन एवं संरक्षण के लिए व्यापक विद्वत मंच की आवश्यकता महसूस हुई थी। इसी उद्देश्य से अखिल भारतीय प्राच्य विद्या परिषद की स्थापना हुई। पुणे स्थित भंडारकर प्राच्यविद्या अनुसंधान संस्थान से इसकी यात्रा शुरू हुई और श्री आर.एन. डांडेकर समेत अनेक विद्वानों ने इसके विस्तार में योगदान दिया।

परंपरागत ज्ञान से AI तक होगा विमर्श

सम्मेलन में भारतीय ज्ञान-परंपरा के अष्टादश विद्या-स्थानों सहित वेद, वेदांत, योग, आयुर्वेद, दर्शन, साहित्य, भाषा, इतिहास और पुरातत्त्व जैसे विषयों पर गहन चर्चा होगी। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), संगणकीय विज्ञान और आधुनिक ज्ञान-विज्ञान से जुड़े विषयों पर भी शोधपरक संगोष्ठियां आयोजित की जाएंगी। प्रो. वरखेड़ी ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य प्राच्य, अर्वाचीन, आधुनिक और अत्याधुनिक ज्ञान-परंपराओं के बीच संवाद और समन्वय स्थापित करना है। विद्यार्थियों, शोधार्थियों और युवा अध्यापकों की सक्रिय भागीदारी सम्मेलन को व्यापक अकादमिक आधार प्रदान करेगी।

‘सनातन धर्म एवं शास्त्र-विमर्श’ पर विशेष संगोष्ठी

सम्मेलन के दौरान ‘सनातन धर्म एवं शास्त्र-विमर्श’ विषय पर विशेष संगोष्ठी भी आयोजित होगी। इसमें विभिन्न संप्रदायों और ज्ञान-परंपराओं से जुड़े आचार्य, मनीषी एवं विद्वान भाग लेंगे। संगोष्ठी में सनातन धर्म के मूल्यों, भारतीय दार्शनिक परंपराओं और विविध मत-परंपराओं के बीच संवाद की संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी।प्रो. वरखेड़ी ने बताया कि परम पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव के आशीर्वाद, आचार्य बालकृष्ण के मार्गदर्शन और साध्वी देवप्रिया के नेतृत्व में पतंजलि परिवार सम्मेलन की मेजबानी की तैयारियों में जुटा है। पतंजलि विश्वविद्यालय के परिसर में देश-विदेश से आने वाले विद्वानों का स्वागत किया जाएगा। उन्होंने देश-विदेश के विद्यार्थियों, शोधार्थियों, अध्यापकों और विद्वानों से सम्मेलन में सहभागी बनने का आह्वान करते हुए कहा कि यह आयोजन भारतीय ज्ञान-परंपरा की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने और आधुनिक ज्ञान-विज्ञान के साथ उसके संवाद का महत्वपूर्ण मंच बनेगा।

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