देश के पहले लेखक गांव में गूंजा आयुर्वेद का राष्ट्रीय मंथन
अमित कुमार
देहरादून। हिमालयीय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय, डोईवाला द्वारा आज देश के पहले लेखक गांव, थानों में एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ‘हिम आयु स्पर्श–2026’ का आयोजन किया गया। सम्मेलन का विषय “आयुर्वेद शल्य-शालाक्य तंत्र में नवाचार” रहा, जिसमें देशभर से आयुर्वेद विशेषज्ञों, चिकित्सकों, शिक्षाविदों एवं शोधार्थियों ने भाग लेकर आयुर्वेद के भविष्य, अनुसंधान और आधुनिक तकनीकों के समन्वय पर व्यापक चर्चा की। कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ तथा पद्मश्री सम्मानित उत्तर प्रदेश आयुर्वेद विभाग के पूर्व निदेशक डॉ. के.के. ठकराल ने भगवान धन्वंतरि के पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया।
संस्था के अध्यक्ष प्रो. प्रदीप कुमार भारद्वाज ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि क्षारसूत्र चिकित्सा पद्धति के प्रणेता प्रो. पी.जे. देशपांडे का जीवन और कार्य नई पीढ़ी के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है। मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. के.के. ठकराल ने कहा कि आयुर्वेद की समृद्ध परंपरा को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान से जोड़कर ही इसे वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई जा सकती है। सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि आयुर्वेद केवल एक चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ एवं संतुलित जीवन जीने की संपूर्ण जीवनशैली है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद को विश्व पटल पर स्थापित करने के लिए शोध, नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) अरुण कुमार त्रिपाठी ने कहा कि युवा शोधार्थी आयुर्वेद की नई संभावनाओं को वैज्ञानिक आधार प्रदान कर सकते हैं और ऐसे सम्मेलन उन्हें नई दिशा एवं प्रेरणा देते हैं। सम्मेलन आयुर्वेद शल्य चिकित्सा में क्षारसूत्र चिकित्सा पद्धति के प्रणेता प्रो. पी.जे. देशपांडे को समर्पित रहा। वैज्ञानिक सत्रों में 100 से अधिक शोधार्थियों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। विशेषज्ञों ने आयुर्वेद शल्य एवं शालाक्य तंत्र में नवाचार, अनुसंधान तथा आधुनिक तकनीकों के समावेश पर अपने विचार साझा किए।समापन सत्र के मुख्य अतिथि उत्तराखंड सरकार के आयुष एवं आयुष शिक्षा मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि अनुसंधान आधारित ऐसे राष्ट्रीय सम्मेलन चिकित्सा क्षेत्र को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागी शोधार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर पूर्व महानिदेशक आयुष प्रो. पूजा भारद्वाज, प्रो. (डॉ.) के.के. पांडेय, प्रो. के.डी. पुरोहित, प्रो. राकेश सुंदरियाल, प्रो. जी.एस. इंदौरिया, प्रो. (डॉ.) बी.आर. त्रिपाठी सहित विभिन्न आयुर्वेदिक शिक्षण संस्थानों से आए शिक्षाविद, चिकित्सक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रो. शिशिर, प्रो. निशांत राय जैन, प्रो. रवि जोशी, प्रो. अरविंद, डॉ. अजीत एवं डॉ. सत्येंद्र का विशेष योगदान रहा, जबकि कार्यक्रम का संचालन डॉ. रूपाली, डॉ. सुष्मिता एवं डॉ. अपेक्षा ने संयुक्त रूप से किया।












Leave a Reply